भारत की आत्मा का संगीत: भाषा, भावना और एकता

भारतीय भाषा उत्सव 2025, भारत की असाधारण सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाने का एक स्वर्णिम अवसर है। यह उत्सव केवल भाषाओं को याद करने का नहीं, बल्कि ‘भाषा अनेक, भाव एक’ के मूल मंत्र को जीवन में उतारने का एक संकल्प है।

भारत में हर कुछ किलोमीटर पर बोली बदल जाती है। हमारी 22 आधिकारिक भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हमारे इतिहास, हमारी परंपराओं और हमारे विचारों को सहेजती हैं। यह भाषाई विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। यह ठीक वैसे ही है जैसे एक सुंदर हार में पिरोए गए अलग-अलग रंग के मोती—हर मोती अनूठा है, पर सब मिलकर एक ही माला की शोभा बढ़ाते हैं।

यह उत्सव हमें सिखाता है कि हमारी बोलियाँ अलग हो सकती हैं, हमारे लिखने के तरीके भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हमारे भाव (भावनाएँ) और हमारी भारतीयता एक है। जब हम किसी बंगाली कविता को सुनते हैं, या किसी तमिल कहानी को पढ़ते हैं, तो भले ही शब्द अपरिचित हों, लेकिन प्रेम, साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की भावना एक ही होती है।

2025 का यह उत्सव हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान करने, अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने का प्रयास करने और इस भाषाई पुल के माध्यम से देश के हर कोने से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है। आइए, इस उत्सव में हम शपथ लें कि हम अपनी भाषाओं के माध्यम से भारत की आत्मा के इस अद्भुत संगीत को जीवित रखेंगे और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में योगदान देंगे।

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